"अनागत विधाता च प्रत्युत्पन्नगतिस्तथा।
द्वावातौ सुखमेवेते यद्भविष्यो विनश्यति॥"
अर्थात - "जो व्यक्ति भविष्य में आनेवाली विपत्ति के प्रति जागरूक रहता है और जिसकी बुद्धि तेज होती है, ऐसा ही व्यक्ति सुखी रहता है । भाग्य के भरोसे बैठा रहनेवाला व्यक्ति नष्ट हो जाता है ।"
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